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Friday, 3 January 2020

MPPSC (Madhya Pradesh Public Service Commission) 2020

NOTIFICATION


MPPSC (Madhya Pradesh Public Service Commission)2020

MPPSC Exam 2020 To succeed in the biggest exam of Madhya Pradesh Public Service Commission (MPPSC), now the views of the country's first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru will also be read. Pt. Nehru has been included in the revised syllabus released by the PSC (MPPSC) for the 'State Service Examination'. He has been placed in the list of philosophers and thinkers in the State Civil Service Exam syllabus. The revised syllabus will be applicable from the State Service Examination-2020.

With the new year, the PSC has announced a revision in the syllabus. The state has announced a new syllabus for the main examination as well as the preliminary examination. In the new syllabus, the number of preliminary and main examination papers and the examination plan were not changed. The PSC mains will have a total of six papers as before. Four of these prescriptions will be for general studies whose course has been rescheduled. There is no significant change in the first prescription.

In the second paper of General Studies, economics, sociology and human resource development have been added along with constitution, governance and political administration. The fourth unit of this paper is housed by Indian political thinkers. A total of eight people are included as thinkers. These include Kautilya, Mahatma Gandhi, Sardar Patel, Dr. Ambedkar, Ram Manohar Lohia, Jayaprakash Narayan (JP) and Pandit Nehru along with Deendayal Upadhyay.

Marks division also changed

Till now the syllabus for the State Service Main Examination included names of 20 thinkers, philosophers and social reformers like Kautilya to Gandhi, Buddha and Shankaracharya, but Nehru was not given a place. Actually, Pandit Nehru was left out of the syllabus in the past years. Pradeep Srivastava, who is preparing for the state service, has described the change as better. Public administration has also been given considerable space in the curriculum. The law part has also been removed. The special thing is that with the inclusion of Pt. Nehru, Deendayal Upadhyay has also been retained. The division and word limit of question marks have also been changed.

NOTIFICATION IN HINDI

MPPSC Exam 2020 मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग (MPPSC) की सबसे बड़ी परीक्षा में सफल होने के लिए अब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) के विचारों को भी पढ़ना होगा। 'राज्यसेवा परीक्षा' (State Civil Service Exam) के लिए पीएससी (MPPSC) द्वारा जारी संशोधित पाठ्यक्रम में पं. नेहरू को शामिल किया गया है। उन्हें दार्शनिक और विचारकों की सूची में राज्यसेवा के पाठ्यक्रम (State Civil Service Exam syllabus) में जगह दी गई है। संशोधित पाठ्यक्रम राज्यसेवा परीक्षा-2020 से लागू होगा।
नए साल के साथ ही पीएससी ने पाठ्यक्रम में संशोधन की घोषणा की है। राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा के साथ मुख्य परीक्षा के लिए भी नया पाठ्यक्रम घोषित किया है। नए सिलेबस में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के पर्चों की संख्या और परीक्षा योजना में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया। पीएससी मेंस में पहले की तरह कुल छह पेपर ही होंगे। इनमें से चार पर्चे सामान्य अध्ययन के होंगे जिनके पाठ्यक्रम को पुनः निर्धारित किया गया है। पहले पर्चे में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
सामान्य अध्ययन के दूसरे पेपर में संविधान, शासन व्यवस्था राजनैतिक प्रशासन के साथ ही अर्थशास्त्र, समाज शास्त्र और मानव संसाधन विकास को जोड़ा गया हैइसी पेपर की चौथी इकाई भारतीय राजनीतिक विचारकों की रखी गई हैइसमें विचारकों के रूप में कुल आठ लोगों को शामिल किया गया हैइनमें कौटिल्य, महात्मा गांधी, सरदार पटेल, डॉ. आंबेडकर, राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण (जेपी) और दीनदयाल उपाध्याय के साथ पंडित नेहरू हैं
अंकों का विभाजन भी बदला
अब तक राज्यसेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में कौटिल्य से लेकर गांधी, बुद्ध और शंकराचार्य जैसे 20 विचारकों, दार्शनिकों व समाज सुधारकों के नाम शामिल थे, लेकिन नेहरू को जगह नहीं दी गई थी। असल में बीते वर्षों में पं. नेहरू को सिलेबस से बाहर कर दिया गया था। राज्यसेवा की तैयारी करवा रहे प्रदीप श्रीवास्तव ने बदलाव को बेहतर बताया है। लोक प्रशासन को भी पाठ्यक्रम में खासी जगह दी गई है। कानून वाला हिस्सा हटाया भी गया है। खास बात ये है कि पं. नेहरू को शामिल करने के साथ दीनदयाल उपाध्याय को भी बरकरार रखा गया है। प्रश्न पत्रों में प्रश्नों के अंक का विभाजन और शब्द सीमा भी बदली गई है।

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